डरावनी बंगला: अजीब रात
- डरावनी बंगला: अजीब रात
रात के अंधेरे में, एक बड़े और पुराने हावड़ा में एक तालाब के पास एक वीराने बंगले में एक युवक आकर्षित हुआ। वह यह सुना था कि बंगले में रात के समय अजीब-अजीब आवाजें आती हैं, लेकिन वह न सिर्फ उनकी बुराई से नहीं बल्कि उनकी बेहतरीनी से भी मशवरा लेने गया।
बंगले में पहुंचकर उसने एक पुरानी तस्वीर देखी, जिसमें एक सुंदर स्त्री की छवि थी, जिसे सामने वाली खिड़की में देख रही थी। वह युवक तस्वीर की ओर बढ़ते हुए उसे एक छिपी हुई कांपती वर्तनी में जड़ा देखता है।
धीरे-धीरे रात बढ़ती है और उसकी धड़कनें तेज हो जाती हैं। अचानक, उसने सुना कि कोई महिला रो रही है, "तुमने मेरी कांपती वर्तनी चुराई है, अब मैं तुम्हारे पास आ रही हूँ!"
युवक की आवाज फिसल जाती है और वह विचलित होकर देखता है कि वह सुंदर स्त्री खिड़की में खड़ी है, लेकिन उसका चेहरा अब डरावना हो चुका है।
उसकी पूरी बिना सोचे-समझे कहानी जोड़ते हुए, वह महसूस करता है कि उसकी पीछे कुछ अदृश्य और शापित शक्तियाँ हैं, जो उसका पीछा कर रही हैं।
डर के मारे, वह भागने की कोशिश करता है, लेकिन बंगले में उसके साथ अजीब घटनाएँ होने लगती हैं। रात की गहराई में, वह जानने की कोशिश करता है कि वह स्त्री कौन थी और उसका असली राज क्या था।
क्या यह युवक उस बंगले के रहस्य को सुलझा पाएगा या उसे उसकी नासमझी में ही खो देगा? इस कहानी का समाधान आपके विचारों पर निर्भर करता है।

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